02. दो मुर्गे एक हिंदी लघु कथा।
दो मुर्गे
दो मुर्गे आपस में बात करते करते अपनी अपनी मजबूती का दवा करने लगे।
पहला मुर्गा – मैं बहुत ताकतवर हूं !
दूसरा मुर्गा – मैं बहुत ताकतवर हूं !
पहला मुर्गा – नहीं! मैं तुमसे ताकतवर हूं !
दूसरा मुर्गा – नहीं! मैं तुमसे ताकतवर हूं !
उसमे से पहला मुर्गा श बोला "चलो मैदान में कूदो वहां पता चल जायेगा की कौन कितना मजबूत है।"
इस बात को सुनते ही दूसरा मुर्गा गुस्से में जमींन पर कूद पड़ा और पहले मुर्गे को ललकार के नीचे बुलाने लगा। ताकत के घमंड में दोनों मुर्गे मैदान में आमने सामने थे।
दोनों में घोर मल्लयुद्ध होता रहा।
इस मल युद्ध में दूसरे मुर्गे ने पहले मुर्गे को धराशायी कर दिया और ख़ुशी के मारे उछल उछल कर घायल मुर्गे पर ताना मारने लगा।
दूसरा मुर्गा – बड़ा आया, मझसे ताकतवर कहने वाला । देखा पड़ा हुआ कैसे बिलबिला रहा है।
इसी बीच मुर्गे के उछल कूद ने ऊपर उड़ रहे बाज का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। वह बाज तुरंत निचे आया और झपट कर मुर्गे को उसको अपनी चोंच से पकड़ कर आसामान में उड़ गया।
कहानी से सीख : अभिमान ले डूबता है
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